तेरे ख़याल को ज़ंजीर करता रहता हूँ

Tere Khayal Ko Zanjir Karta Rahta Hun - तेरे ख़याल को ज़ंजीर करता रहता हूँ

तेरे ख़याल को ज़ंजीर करता रहता हूँ मैं अपने ख़्वाब की ताबीर करता रहता हूँ, तमाम रंग अधूरे लगे तिरे आगे सो तुझ को लफ़्ज़ में तस्वीर करता रहता हूँ, जो बात दिल से ज़बाँ तक सफ़र नहीं करती उसी को शेर में तहरीर करता रहता हूँ, दुखों को अपने छुपाता हूँ मैं दफ़ीनों सा … Read more

बस एक तिरे ख़्वाब से इंकार नहीं है

Bas Ek Tere Khwab Se Inkar Nahin Hai - बस एक तिरे ख़्वाब से इंकार नहीं है

बस एक तिरे ख़्वाब से इंकार नहीं है दिल वर्ना किसी शय का तलबगार नहीं है, आँखों में हसीं ख़्वाब तो हैं आज भी लेकिन ताबीर से अब कोई सरोकार नहीं है, दरिया से अभी तक है वही रब्त हमारा कश्ती में हमारी कोई पतवार नहीं है, हैरत से नए शहर को मैं देख रहा … Read more