इस भरे शहर में कोई ऐसा नहीं

इस भरे शहर में कोई ऐसा नहीं

इस भरे शहर में कोई ऐसा नहीं जो मुझे राह चलते को पहचान ले और आवाज़ दे ओ बे ओ सर-फिरे, दोनों इक दूसरे से लिपट कर वहीं गिर्द-ओ-पेश और माहौल को भूल कर गालियाँ दें हँसें हाथा-पाई करें पास के पेड़ की छाँव में बैठ कर, घंटों इक दूसरे की सुनें और कहें और … Read more

कोई जो रहता है रहने दो मस्लहत का शिकार

कोई जो रहता है रहने दो मस्लहत का शिकार - koi jo rahta hai rahne do maslahat ka shikar

कोई जो रहता है रहने दो मस्लहत का शिकार चलो कि जश्न-ए-बहाराँ मनाएँगे सब यार, चलो निखारेंगे अपने लहू से आरिज़-ए-गुल यही है रस्म-ए-वफ़ा और मनचलों का शिआ’र, जो ज़िंदगी में है वो ज़ह्र हम भी पी डालें चलो हटाएँगे पलकों से रास्तों के ख़ार, यहाँ तो सब ही सितम-दीदा ग़म-गज़ीदा हैं करेगा कौन भला … Read more