आग चूल्हे की बुझी जाती है

Aag Chulhe Ki Bujhi Jati Hai - आग चूल्हे की बुझी जाती है

आग चूल्हे की बुझी जाती है चाँदनी है कि खिली जाती है, जिस क़दर नीचे उतरता हूँ मैं झील भी गहरी हुई जाती है, गर्द उठी है जो मिरी ठोकर से एक दीवार बनी जाती है, पहरे होंटों पे बिठाने वाले बात आँखों से भी की जाती है, लोग साहिल पे खड़े देखते हैं नाव … Read more

आँधी में चराग़ जल रहे हैं

Aandhi Mein Charagh Jal Rahe Hain - आँधी में चराग़ जल रहे हैं

आँधी में चराग़ जल रहे हैं क्या लोग हवा में पल रहे हैं, ऐ जलती रुतो गवाह रहना हम नंगे पाँव चल रहे हैं, कोहसारों पे बर्फ़ जब से पिघली दरिया तेवर बदल रहे हैं, मिट्टी में अभी नमी बहुत है पैमाने हुनूज़ ढल रहे हैं, कह दे कोई जा के ताएरों से च्यूँटी के … Read more