तुम्हें जब कभी मिलें फ़ुर्सतें मिरे दिल से बोझ उतार दो

tumhein jab kabhi milen fursaten mere dil se bojh utar do - तुम्हें जब कभी मिलें फ़ुर्सतें मिरे दिल से बोझ उतार दो

तुम्हें जब कभी मिलें फ़ुर्सतें मिरे दिल से बोझ उतार दो मैं बहुत दिनों से उदास हूँ मुझे कोई शाम उधार दो, मुझे अपने रूप की धूप दो कि चमक सकें मिरे ख़ाल-ओ-ख़द मुझे अपने रंग में रंग दो मिरे सारे रंग उतार दो, किसी और को मिरे हाल से न ग़रज़ है कोई न … Read more

मैं तकिए पर सितारे बो रहा हूँ

main takiye par sitare bo raha hun - मैं तकिए पर सितारे बो रहा हूँ

मैं तकिए पर सितारे बो रहा हूँ जनम-दिन है अकेला रो रहा हूँ, किसी ने झाँक कर देखा न दिल में कि मैं अंदर से कैसा हो रहा हूँ, जो दिल पर दाग़ हैं पिछली रुतों के उन्हें अब आँसुओं से धो रहा हूँ, सभी परछाइयाँ हैं साथ लेकिन भरी महफ़िल में तन्हा हो रहा … Read more