मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है

mil hi jaega kabhi dil ko yaqin rahta hai - मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है

मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है वो इसी शहर की गलियों में कहीं रहता है, जिस की साँसों से महकते थे दर-ओ-बाम तिरे ऐ मकाँ बोल कहाँ अब वो मकीं रहता है, इक ज़माना था कि सब एक जगह रहते थे और अब कोई कहीं कोई कहीं रहता है, रोज़ मिलने पे … Read more

ये तंहा रात ये गहरी फ़ज़ाएँ

ye tanha raat ye gahri fazaen - ये तन्हा रात ये गहरी फ़ज़ाएँ

ये तंहा रात ये गहरी फ़ज़ाएँ उसे ढूँढे के इस को भूल जाएँ, ख़यालों की घनी ख़ामोशियों में घुली जाती हैं लफ़्ज़ों की सदाए, ये रस्ते रह-रवों से भागते हैं यहाँ छुप छुप के चलती हैं हवाएँ, ये पानी ख़ामोशी से बह रहा है इसे देखें के इस में डूब जाएँ, जो ग़म जलते हैं … Read more