आशिक़ थे शहर में जो पुराने शराब के

aashiq the shahr mein jo purane sharab ke - आशिक़ थे शहर में जो पुराने शराब के

आशिक़ थे शहर में जो पुराने शराब के हैं उन के दिल में वसवसे अब एहतिसाब के, वो जो तुम्हारे हाथ से आ कर निकल गया हम भी क़तील हैं उसी ख़ाना-ख़राब के, फूलों की सेज पर ज़रा आराम क्या किया उस गुल-बदन पे नक़्श उठ आए गुलाब के, सोए तो दिल में एक जहाँ … Read more

एक क़तरा अश्क का छलका तो दरिया कर दिया

ek qatra ashk ka chhalka to dariya kar diya - एक क़तरा अश्क का छलका तो दरिया कर दिया

एक क़तरा अश्क का छलका तो दरिया कर दिया एक मुश्त-ए-ख़ाक जो बिखरी तो सहरा कर दिया, मेरे टूटे हौसले के पर निकलते देख कर उस ने दीवारों को अपनी और ऊँचा कर दिया, वारदात-ए-क़ल्ब लिक्खी हम ने फ़र्ज़ी नाम से और हाथों-हाथ उस को ख़ुद ही ले जा कर दिया, उस की नाराज़ी का … Read more