होंटों पे कभी उन के मिरा नाम ही आए

honton pe kabhi un ke mera nam hi aae - होंटों पे कभी उन के मिरा नाम ही आए

होंटों पे कभी उन के मिरा नाम ही आए आए तो सही बर-सर-ए-इलज़ाम ही आए, हैरान हैं लब-बस्ता हैं दिल-गीर हैं ग़ुंचे ख़ुश्बू की ज़बानी तिरा पैग़ाम ही आए, लम्हात-ए-मसर्रत हैं तसव्वुर से गुरेज़ाँ याद आए हैं जब भी ग़म-ओ-आलाम ही आए, तारों से सजा लेंगे रह-ए-शहर-ए-तमन्ना मक़्दूर नहीं सुब्ह चलो शाम ही आए, क्या … Read more

आलम ही और था जो शनासाइयों में था

आलम ही और था जो शनासाइयों में था - aalam hi aur tha jo shanasaiyon mein tha

आलम ही और था जो शनासाइयों में था जो दीप था निगाह की परछाइयों में था, वो बे-पनाह ख़ौफ़ जो तन्हाइयों में था दिल की तमाम अंजुमन-आराइयों में था, इक लम्हा-ए-फ़ुसूँ ने जलाया था जो दिया फिर उम्र भर ख़याल की रानाइयों में था, इक ख़्वाब-गूँ सी धूप थी ज़ख़्मों की आँच में इक साए-बाँ … Read more