फिर किसी हादसे का दर खोले

phir kisi hadse ka dar khole - फिर किसी हादसे का दर खोले

फिर किसी हादसे का दर खोले पहले पर्वाज़ को वो पर खोले, जैसे जंगल में रात उतरी हो यूँ उदासी मिली है सर खोले, पहले तक़दीर से निमट आए फिर वो अपने सभी हुनर खोले, मंज़िलों ने वक़ार बख़्शा है रास्ते चल पड़े सफ़र खोले, जो समझता है ज़िंदगी के रुमूज़ मौत का दर वो … Read more

कभी पुकार के देखा कभी बुलाए तो

kabhi pukar ke dekha kabhi bulae to - कभी पुकार के देखा कभी बुलाए तो

कभी पुकार के देखा कभी बुलाए तो हुदूद-ए-ज़ात से आगे निकल के आए तो, पिला रहा है निगाहों को तीरगी का लहू फ़सील-ए-जाँ पे वो कोई दिया जलाए तो, सजाए रक्खूँगी अपने गुमान की दुनिया मिरे यक़ीन की मंज़िल पे कोई आए तो, ये आँखें नींद को तरसी हुई हैं मुद्दत से वो ख़्वाब-ज़ार-ए-शबिस्ताँ कोई … Read more