इक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ

ek wazifa hai kisi dard ka dohraya hua

इक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ जिस की ज़द में है पहाड़ों का धुआँ आया हुआ, ये तिरे इश्क़ की मीक़ात ये होनी की अदा धूप के शीशे में इक ख़्वाब सा फैलाया हुआ, बाँध लेते हैं गिरह में उसी मंज़र की धनक हम ने मेहमान को कुछ देर है ठहराया हुआ, ताइरो … Read more

अब तुम को ही सावन का संदेशा नहीं बनना

ab tum ko hi sawan ka sandesa nahin banna

अब तुम को ही सावन का संदेशा नहीं बनना मुझ को भी किसी और का रस्ता नहीं बनना, कहती है कि आँखों से समुंदर को निकालो हँसती है कि तुम से तो किनारा नहीं बनना, मोहतात है इतनी कि कभी ख़त नहीं लिखती कहती है मुझे औरों के जैसा नहीं बनना, तस्वीर बनाऊँ तो बिगड़ … Read more