मोहिबो निछोहिबो सनेह में तो नयो नाहिं

मोहिबो निछोहिबो सनेह में तो नयो नाहिं
भले ही निठुर भये, काहे को लजाइये,

तन मन रावरे सो मतों के मगन हेतु
उचरि गये ते कहा तुम्हें खोरि लाइये,

चित लाग्यो जित, जैहै तितही ’रहीम’ नित
धाधवे के हित इत एक बार आइये,

जान हुरसी उर बसी है तिहारे उर
मोसों प्रीति बसी तऊ हँसी न कराइये।

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